ना आँख नम थी, ना था कोई गम, कोई चूक हमसे ना हुई थी, भला क्यों डरे हम? वह देखो मेरे द्वार पर चलकर... ना आँख नम थी, ना था कोई गम, कोई चूक हमसे ना हुई थी, भला क्यों डरे हम? वह देख...
मृत्यु संग...... मृत्यु संग......
कोई नेता न बेचने पाए, कफ़न किसी शहीद का, उस वसंती शाम को.... कोई नेता न बेचने पाए, कफ़न किसी शहीद का, उस वसंती शाम को....
बस मृत्यु ही है सत्य अटल। बस मृत्यु ही है सत्य अटल।
बहाना बन जाता है जाना सबको है पर इस सच्चाई से हर कोई घबराता है काश कोई इसे समझ पाता बहाना बन जाता है जाना सबको है पर इस सच्चाई से हर कोई घबराता है काश कोई इसे ...